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Chapter 122

इश्क़ या जुनून - Chapter 122

इधर अंबर धरा के नजदीक आकर बैठता है और बोलता है,,,,,,,,,,,,, सॉरी.....!! मेरी वजह से तुम्हारी मेहंदी खराब हो गई....!! प्लीज़ तुम ऐसे रोओ मत.....!! धरा की आंखों से गिरते आंसू अंबर को बुरी तरह परेशान कर रहे थे इतना परेशान की अंबर की आंख में आंसू आ जाता है जिसका एहसास उसे तब होता है जब एक आंसू उसके गाल पर लुढ़क कर आ जाता है......!! लेकिन उसको इसका एहसास ही नहीं होता और वो अपना गला साफ कर मुस्कुराने की कोशिश करते बोलता है,,,,,,अच्छा दिखाओ तो ......!! फिर अंबर खुद ही धरा के हाथ को पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए बोलता है ,,,,अरे ज्यादा कहां खराब हुई है इतनी तो खराब भी नहीं हुई जितना तुम रो रही हो......!! इधर कोने पर जरा सा खराब हुआ है.......!!

इसी कोने पर हमारा और क्षितिज का नाम लिखा हुआ था......!! लेकिन देखिए सिर्फ हमारा नाम रह गया क्षितिज का K तो बिगड़ ही गया.....!! धरा मोटे मोटे आंसू बहाते हुए बोलती है।

अंबर  :(चौंकते हुए) ओ माय गॉड ये तो बहुत बड़ा अपशगुन  हो गया......!! तुम समझ नहीं रही हो इसका क्या मतलब है धरा ना में गर्दन हिलाती है तो अंबर अपनी बात जारी रखते हुए बोलता है,,,,,,, इसका मतलब है............. रुक कर अंबर थोड़ा सा सस्पेंस क्रिएट करता है जिसके चलते धरा रोना बंद करके अंबर की बात को सुनने के लिए पूरे कंसंट्रेशन के साथ बैठ जाती है.....!!

लेकिन अंबर को खामोश देखकर बोलती है बताइए ना क्या मतलब है इसका......??

अंबर :अरे इसका सीधा सा मतलब है कि तुम्हारे बाबा जी तुम्हें इशारा दे रहे हैं कि कन्या मत कर इस छछूंदर से शादी....!! वैसे भी शादी सिवाय बर्बादी के कुछ भी नहीं है।

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