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Chapter 107

इश्क़ या जुनून - Chapter 107

कोई और आएगी या नहीं लेकिन फिलहाल अंबर को प्यार सिखाने की कोशिश तो खुद ही कर रही थी।

धरा मुस्कुरा का अंबर को समझाएं जा रही थी और अंबर धरा की बातें खामोशी से सुन रहा था....!! तभी अंबर का फोन बजता है ...!! दूसरे छोर पर मिलन था ....!!

अंबर : हां बोल मिलन.....!!

मिलन : अंबर मैंने ये बताने के लिए कॉल किया था कि मैं आज भी मुंबई नहीं लौट रहा हूं....!! जर्मनी में हमने इंडिया आने से पहले जो प्रोजेक्ट शुरू किया था उस प्रोजेक्ट के पार्टनर यहां इंडिया में भी हमारे साथ एक प्रोजेक्ट करना चाहते हैं और इसी सिलसिले में वो दिल्ली आ रहे हैं तो मैं ये कह रहा था कि तू भी दिल्ली................

अंबर : मेरी जरूरत नहीं पड़ेगी वहां पर उस प्रोजेक्ट को तू ही लीड कर रहा था तो यहां पर भी तू ही उसे अच्छे से देख पाएगा। वैसे भी मैंने पहले ही उन्हें तुझसे मिलने के लिए बोल दिया था। मैं तुझे बताना भूल गया। इस बारे में मेरी उनसे एक हफ्ते पहले ही बात हो गई थी बोलते हुए अंबर धरा की तरफ देखता है ....!!

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