इश्क़ या जुनून -(शेर को सवा शेरनी) Chapter 33
धरा जहां हक्की बक्की सी कभी अंबर, कभी मिलन, और कभी फर्श पर बिखरे वास को देखती है वही मिलन के लिए ये कोई नई बात नहीं थी.....!! बस इस बार फर्क इतना था कि पहले ये घटना उसके साथ अकेले में घटती थी मगर पहली बार धरा इसकी साक्षी बनी थी.....!!
केबिन में एकदम से शांति छा गई थी ......!! लेकिन कुछ पल बाद ही यह शांति फोन के बजने पर टूटती है.....!!
अंबर कॉल अटेंड करते हुए बोलता है,,,,,,,, बोलिए दादाजी.......!!
लेकिन उधर से अंबर के दादाजी बलजीत खुराना की रौबीली आवाज ना सुनाई देकर किसी और की खबराई सी आवाज आती है.......!! सा.....सा......साहब.......साहब
अंबर जो पहले से ही झल्लाया हुआ था ,चिल्लाते हुए बोलता है ,,,,,,हूं द हेल आर यू तुम्हारे पास दादाजी का फोन कैसे.......?? और तुम साहब से आगे कुछ बोलोगे कि नहीं......??
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