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Chapter 89

इश्क़ या जुनून - Chapter 89

धरा पोहे से भरी स्पून अंबर के मुंह में ठूस देती है........!! धरा की इस हरकत पर अंबर की आंखें हैंरानी से चौड़ी हो जाती है....!!

तो वही बलजीत जी मंद मंद मुस्कुराते हुए मन में बोलते हैं,,,, अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे यही लड़की एक दिन तुझे अपनी उंगलियों पर नाचाएंगी....!! फिलहाल बेशक जबरदस्ती नाच रहा है....!! लेकिन मुझे यकीन है कि एक दिन खुशी खुशी नाचेगा.....!!

अंबर गुस्से में चीखने के लिए धरा को घूर कर देखता है लेकिन इससे पहले कि मुंह खोलकर कुछ बोल पाता तब तक पोहे का टेस्ट अंबर के मुंह में घुलने लगता है और अंबर जोकि अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए अपनी प्लेट फेंकने के लिए उठा चुका था कुछ पल रुक कर वापस नीचे रख देता है और धरा को सिर्फ गुस्से भरी नजरों से घूर कर देखता है और फिर नकली नाराजगी के साथ बोलता है,,,,,,, अन्न का अपमान नहीं करना चाहता इसलिए नहीं फेंक रहा हूं लेकिन आइंदा अपनी मर्जी से कुछ नहीं बनाओगी तुम.....!!

क्यों नहीं बनाएगी जब तक हम यहां है तब तक धरा जो बनाएगी हम वही खाएंगे। बेटा तुझे इससे घबराने की जरूरत नहीं है तेरा जो मन आए वो बना...!! यहां ये तेरा बाॅस नहीं है जो तू इसके ऑर्डर मांनेगी ....!! यहां के हम सिकंदर है और यहां सिर्फ हमारी हुकुमत चलेगी बल्कि हम पर भी तुम्हारी हुकुमत चलेगी.....!!

ये सुनते ही अंबर बड़े ठंडे लहजे में बोलता है,,,,,, बेशक मैं यहां बाॅस ना सही लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि किसी की भी मनमानी  चलेगी ....!!देखता हूं नेक्स्ट टाइम कैसे कोई अपनी चलाता है ....?? अंबर तिरछी नजर से धरा को देखते हुए बोलता है!

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