इश्क़ या जुनून - (बहू के टैग वाली नर्स)Chapter 36
काफी देर की बहस बाजी के बाद अंबर के दादाजी को एक बार फिर से सांस लेने में दिक्कत होने लगती है लेकिन फिर भी अंबर के दादा जी पूरी तरह से अड़ गए थे लेकिन फिर भी किसी तरह से ना तो हार मानने को तैयार थे और ना ही मैदान छोड़ने को तैयार थे .....!! अपने दादाजी की बिगड़ती तबियत और उनको किसी भी तरह से हार ना मानते देख अंबर सरेंडर करते हुए बोलता है,,,,,,,,फाइन......!! कीजिए जो आपको करना है.....!! लेकिन मेरी एक बात ध्यान से सुन लीजिए ये कोशिश आप एक बार पहले भी कर चुके हैं। लेकिन इस बार लड़कियों के इंटरव्यू आप लेंगे। मैं किसी भी लड़की को देखने नहीं जाऊंगा और ना ही किसी को यहां बुला कर बिठा लेना......!!मुझे सिर्फ दिन, तारीख और समय बता देना ....!!पहुंच जाऊंगा......!! और एक बात.....!! ये शादी कोर्ट मैरिज होगी .....!!उल्टे सीधे किसी भी रिचुअलस में मैं नहीं पड़ने वाला .....!!बोलते हुए अंबर आगे बढ़ता है तो,,,,,,,,,,,
दादाजी :(अंबर के पीछे आते हुए) ओए खोते....!! तेरी शादी की बात कर रहा हूं ये कौन सा तरीका हुआ पहुंच जाऊंगा......!! लड़की तो तुझे देखनी ही पड़ेगी.......!! ऐसे कोर्ट वोर्ट मैरिज नहीं होगी.....!! आखिर तेरी शादी है.......!!
अंबर : (खींजते हुए) अच्छा ....!!मुझे तो पता ही नहीं था आप मेरी शादी की बात कर रहे हो.......!! मुझे तो लगा था इस उम्र में मेरे लिए एक नई दादी ला रहे हैं........!! एक बात अच्छे से समझ लीजिए आपको बहू चाहिए मुझे पत्नी नहीं चाहिए तो आप जिसे कहेंगे उसे आपकी बहू बना दूंगा.....!! लेकिन उसे अच्छे से समझा देना मेरे रूम में आ मेरे आस-पास नजर ना जाए......!!
दादाजी : ओए खोते पूरी बात सुन ले मेरी.....!! मेरी बहू को तुझे अपनी पत्नी मानना ही पड़ेगा ।
अंबर : इंपासिबल...!! ऐसा कभी नहीं होगा....!!
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