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Chapter 44

इश्क़ या जुनून - Chapter 44

धरा धीरे से फुसफुसाते हुए बोलती है,,,,,,,, हमारा फोन वापस दीजिए........!!

लेकिन अंबर के दिमाग में तुरंत ही खुराफात आती है और वो जहरीली मुस्कुराहट के साथ बोलता है,,,,,,,,, दादी मां मैं हूं अंबर खुराना......!! कब से बोल रहा हूं मिस धरा को कि तुम्हारे घर वाले परेशान हो रहे होंगे घर जाओ...!! और घर नहीं जा रही हो तो कम से कम अपने घर एक फोन ही कर दो.....!! काम का क्या है काम तो होता ही रहेगा....!! लेकिन घर वाले कितने परेशान हो रहे होंगे....!! वैसे भी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं धरा के साथ वो इंसीडेंट हुए....!! ऐसे में धरा को इतना रिस्पांसिबल तो होनी ही चाहिए।

अंबर :धरा की दादी से धरा की शिकायत कर रहा था!(शिकायत क्या कर रहा था उन्हें भड़का रहा था ताकि घरवाले धरा के लेट होने पर अंबर को उसकी वजह बताने पर धरा की बात पर यकीन ना करें....!! धरा को इररिस्पांसिबल और खुद को बहुत जिम्मेदार इंसान दिखाने की कोशिश कर रहा था...!! और यह सब करने के पीछे उसकी वास्तव में क्या सोच थी ये तो अंबर ही जानता था! क्योंकि जब अंबर कोई प्लान बनाता है तो उसे इतनी जल्दी समझ पाना किसी के बस की बात नहीं होती। ) और धरा अंबर को घूर कर देख रही थी।

कमला जी : पुत्तर जी ऐसी ही है मेरी धरा.....!! आपने जो इसके साथ अच्छा व्यवहार किया है ना, उसके बदले में आपकी हर परेशानी में आपसे ज्यादा ये परेशान होने वाली है। कोई इतना सा भी कुछ कर दे उसके लिए तो एक पैर पर खड़ी हो जाती है। आपने तो फिर भी मेरी धरा को नई जिंदगी दी है.....!! ये तो दुश्मनों का भी बुरा नहीं कर सकती......!! इतने कोमल मन की है.....!! नाम क्या धरा रख दिया एकदम धरती मां की तरह विशाल हृदय वाली है....!! जैसे धरती मां कष्ट सहकर भी कष्ट देने वालों का बुरा कभी नहीं करती.....!! धरती मां की तरह ही बहुत सहनशील है....!! धरती मां की तरह ही कोई कितना भी जख्म दे लेकिन फिर भी एक अच्छाई का छोटा सा बीज डाल दे तो वही काफी है। सामने वाले की हजार बुराइयों के बदले में सिर्फ अच्छा ही उसे लौटाएगी......!!

धरा की दादी मां यहीं नहीं रुकती शुरू होती है तो धरा की तारीफों के बड़े-बड़े पुल बांधती चली जाती है.....!! जबकि अंबर अपने माथे पर अपनी उंगलियां घुमाते हुए कमला जी की बातों से इरिटेट हो रहा था.....!! क्योंकि जो उसने चाहा था वैसा कुछ हो नहीं रहा था।

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