इश्क़ या जुनून - Chapter 117
अंबर की बात सुनकर धरा को अपनी गलती का एहसास होता है और वो तुरंत अंबर के गले में अभी भी लिपटी अपनी कलाइयों को पीछे खींच लेती है और झेंपते हुए चोर नजरों से एक बार सब की तरफ देखती है।
पायल जी को धरा को सुनाने का एक मौका मिल गया था...!! ऐसा मौका जहां वो सब के सामने धरा को डांट सकती थी और इस वक्त कोई भी उन्हें कुछ नहीं कहता क्योंकि जो कुछ भी हुआ था वहां बड़े आराम से पायल जी धरा को गलत साबित करते हुए बात का बतंगड़ बना सकती थी जैसा कि वो हर वक्त करने के मौके तलाशती हैं तिरछी नजर से कभी कमला जी को और कभी अंबर और धरा को देखते हुए बोलती है,,,,,,,, क्षितिज के घर से आई हल्दी तो रखी रह गई मैडम ने तो किसी और के ही नाम की हल्दी लगा ली वह भी एकदम फिल्मी स्टाइल में.......!! पूछ लीजिए अपनी लाडली से शादी क्षितिज से ही करेगी या जिनकी बाहों में है उसी की दुल्हन............
कमला जी धीमे लेकिन सख्त लहजे में बोलती हैं,,,,,,,, घर की शांति खत्म ना हो इसलिए चुप रह जाती हूं तो यह मत समझना कि गूंगी हो गई हूं अपनी जुबान कंट्रोल में रखो बहू ऐसा ना हो बेटी की विदाई से पहले घर की बहू की विदाई हो जाए.....!!
इतना बोलकर कमला जी मौके की नजाकत और पायल जी के चेहरे पर कमला जी के बात सुनाने के बाद भी गुस्से के बजाय उतर आई कुटिल मुस्कान को देख पायल जी के इरादों को भांपते हुए पायल जी से पहले अंबर की तरफ कदम बढ़ाते हुए बोलती हैं,,,,,,,, अरे अंबर पुत्तर कितने सही मौके पर आए हो....!! ये लड़की तो अभी चोट खा बैठती.....!!
पायल जी जैसे ही कुछ बोलने के लिए मुंह खोलने वाली होती हैं तभी कमल जी जल्दी से बोलती है,,,,,, पायल बहु ये धरा की कंपनी के सी.ई.ओ. हैं मशहूर बिजनेसमैन अंबर खुराना....!! जाओ जरा जाकर कुछ नाश्ते वाश्ते का इंतजाम करो...!! इतने बड़े आदमी है.....!! बहुत कीमती समय है इनका.....!! फिर भी हमारी धरा के फंक्शन में आए हैं ...!! जाओ जाओ जल्दी करो......!!
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