इश्क़ या जुनून - Chapter 46
फिलहाल अंबर ज्यादा कुछ भी सोच पाने की स्थिति में नहीं था....!! दिमाग जैसे सुन्न सा पड़ गया था और अपने सेंसिज में अंबर तब आता है जब धरा अंबर से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए गुस्से से बोलती है ,,,,,,,, छोड़िए हमारा हाथ......!! ये बोलने के साथ ही धरा अंबर के सीने पर अपने दूसरे हाथ से मुक्का मारती हैं....!! अंबर ने अपने दोनों हाथ से धरा का सीधा हाथ थामा हुआ था । एक हाथ से अंबर ने धरा की कलाई पकड़ी हुई थी और दूसरे हाथ से अंबर धरा के हाथ से उस वास्को लेने की कोशिश के तहत उसकी मुट्ठी खोलने की कोशिश कर रहा था।
धरा अंबर को लगातार मुक्के मार रही थी लेकिन अंबर इस पर जरा भी ध्यान नहीं देता क्योंकि उसका पूरा कंसंट्रेशन धरा के हाथ से उस टूटे कांच के वास को छीनने में था ....!! ताकत में धरा अंबर के सामने कहीं नहीं ठहरती थी लेकिन जहां एक तरफ वास पर धरा की पकड़ बहुत मजबूत थी.....! वही दूसरी तरफ अंबर आराम से उसके हाथ से वास को लेने की कोशिश कर रहा था। चाकू होता तो एक ही तरफ उसमें धार होती और ऐसे में अंबर के लिए आसान होता धरा के हाथ से चाकू छीन लेना। लेकिन वास टूट कर कई खंजर खुद में समेटे हुआ था....!! और यही कारण था कि अंबर चाह कर भी उतनी सख्ती नहीं कर रहा था।
अंबर काफी एहतियात के साथ धरा के हाथ से टूटे कांच के वास को लेने की कोशिश कर रहा था
जब धरा अंबर की कोशिशों के बाद भी वास पर से अपनी पकड़ ढीली नहीं कर रही थी तो अंबर धरा का हाथ मरोड़ देता है....!! धरा खुद का हाथ मरोड़े जाने पर खुद को यथास्थिति करने के लिए खुद भी उसी दिशा में घूम जाती है । इस हाथापाई में जहा धरा की पीठ अंबर के सीने से जा लगती है वही एक दो जगह अंबर के कट भी लग जाता है। ऐसा होते ही अंबर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। और अब अंबर धरा के हाथ पर और सख्ती करते हुए तथा खुद पर लगे जख्मों की परवाह किए बिना, धरा के हाथ से वास लेने में कामयाब हो ही जाता है।
इधर अंबर जैसे ही धरा के हाथ से वास लेकर एक तरफ फेंकता है। धरा अपना हाथ छुड़ाने के लिए अंबर के हाथ में काटने के लिए जैसे ही अंबर के हाथ की तरफ झुकती है और अपने दांत अंबर की कलाई पर लगभग गढ़ा ही देती है तभी अंबर की वाइट शर्ट को लाल होते देख वहीं रुक जाती है।
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