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Chapter 96

इश्क़ या जुनून - Chapter 96

2महीने से अंबिका से बात नहीं हुई थी हम लोग जर्मनी पहुंच गए, बिना किसी को इत्तिला दिए सरप्राइज देने के लिए और कहीं ना कहीं मन में अजीब सी घबराहट थी! दिल कह रहा था कि कुछ तो गलत हुआ है...!!

जर्मनी पहुंचकर जो सबसे पहला शाॅक हमें लगा वो अंबिका से ही रिलेटेड था.....!!

सुनकर यकीन ही नहीं हुआ की अंबिका का किसी से अफेयर था और अंबिका, गुड़िया को लेकर अपने प्रेमी के साथ भाग गई ....!! यकीन ही नहीं हुआ हमें कि वो ऐसा कर सकती है....!! अंबर में तो जान बसती थी उसकी फिर अंबर को साथ क्यों नहीं ले गई.....?? सवाल किया था मैंने अपने बेटे से तो उसने जवाब दिया शायद इसलिए कि अंबर अब इतना बड़ा हो गया था कि कुछ हद तक समझ सकता था और वो उसके प्रेमी को हरगिज़ अपने पापा का दर्जा नहीं देता।

अभी हम इस शाॅक से उभर भी नहीं पाए थे कि तभी दूसरा शाॅक लगा रणधीर की दूसरी शादी के बारे में सुनकर......!! रणधीर ने अपनी नई सेक्रेटरी से दूसरी शादी कर ली थी

लेकिन शाॅक खत्म ही नहीं होने वाले थे अंबर ने भी बड़े आराम से अपनी नई मां को मां का दर्जा दे दिया था जिस मां के सबसे ज्यादा करीब था अपनी आंखें भी अंबिका का चेहरा देखे बिना नहीं खोलता था उसकी जगह अपनी सौतेली मां को पड़े आराम से स्वीकार लिया था उसने.....!! ये सच में नई मां के प्रति प्यार था या अपनी सगी मां के छोड़ कर चले जाने का गुस्सा था उस वक्त नहीं समझ में आया था.......!! लेकिन एक बात की राहत थी कि जहां इस सच को हम नहीं संभाल पा रहे थे अंबर जिसका हमें डर था कि पता नहीं खुद को कैसे संभालेगा बड़े अच्छे से उसने खुद को संभाल लिया था ....!! कम से कम उस वक्त अंबर को देखकर तो ऐसा ही हमें लगा था....!!

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