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Chapter 62

इश्क़ या जुनून - Chapter 62

ज्वैलरी शोरूम से जैसे ही दोनों बाहर निकलते हैं तभी क्षितिज का एक जरूरी कॉल आ जाता है और वो एक साइड खड़े होकर फोन पर बात करता है और 2 मिनट बाद धरा के पास आकर बोलता है,,,,,,, आई एम सॉरी धरा मुझे जरूरी काम के सिलसिले में जाना पड़ रहा है। प्लीज़ तुम........

धरा : ओफ्फो क्षितिज आप इतने फॉर्मल क्यों हो रहे है.....?? जाना जरूरी होगा तभी तो आप जा रहे है ना....!! वरना क्या हम नहीं जानते कि आप हमें ऐसे छोड़कर नहीं जाएंगे ...!! हमारी शादी की शॉपिंग करने के लिए जितने हम एक्साइटेड हैं उतने ही आप भी होंगे....!! और वैसे भी हमारा लहंगा और आपकी शेरवानी हम दोनों मिलकर पसंद कर चुके हैं....!! मामूली से शॉपिंग बची है वो हम नेक्स्ट वीक कर लेंगे.....!! क्योंकि हमें लगता है मम्मी जी काफी थक गई हैं.....!!

ठीक है फिर फ्री होते ही तुम्हें कॉल करता हूं.....!! और हां अगर मॉम ठीक फील करे तो प्लीज़ अपनी शॉपिंग खत्म कर लेना ....!!  मुझे नहीं लगता कि मैं नेक्स्ट संडे भी फ्री रहने वाला हूं......!!

धरा  :आप परेशान लग रहे हैं....!! आपने तो बोला था लोन की प्रॉब्लम सॉल्व हो गई लेकिन आपको परेशान देखकर तो.........

क्षितिज  : हां सोल्व हुई है लेकिन पूरी तरह  नहीं मतलब जिस तरह में शुरू करने वाला था उस तरह नहीं इतना बोलकर क्षितिज गहरी सांस लेता है और बोलता है,,,,,, खैर छोड़ो ना ये सब टेंशन मुझ पर छोड़ दो जल्दी ही हमारी शादी होने वाली है तुम बस उस पर ध्यान दो.....!! क्योंकि मैं नहीं चाहता कि जब हमारी शादी हो तो टेंशन की वजह से मेरी दुल्हन के चेहरे की रौनक कम हो......!! (क्षितिज धरा के गाल को छूते हुए बोलता है)

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