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Chapter 84

इश्क़ या जुनून - Chapter 84

अंबर  :ऑर्डर मै सिर्फ एक ही इंसान के फॉलो करता हूं और वो है मेरे दादाजी....!! तो अगली बार मुझे ऑर्डर देने की कोशिश मत करना कहते हुए धारा के पैर को पकड़ता है तो धारा तुरंत आगे बढ़कर अंबर के हाथ पर अपना हाथ रखकर उसके हाथ से अपना पैर छुड़ाने की कोशिश करती है और साथ ही अपने पैर भी पीछे खींचने की कोशिश करती है।

अंबर :(गुस्से से) 2 मिनट शांति से बैठ नहीं सकती हो तुम......?? इस तरह की हरकत करके क्या दिखाने की कोशिश कर रही हो....??

क्या जताना चाहती हो....?? हां...??

इतना बोल कर अंबर धरा के पैर को और कस के पकड़ते हुए जैसे ही हल्के से उसके प्लाजों को थोड़ा ऊपर खिसकाता हैं तो धरा अपने पैर को छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोलती है,,,,, प्लीज़ ..........!! और बस इसी एक शब्द के साथ धरा की आंखों से आंसू की धारा बहने लगती है.....!!

धरा को यूं आंसू बहाते देख अंबर बुरी तरह से चिढ़ते हुए बोलता है,,,,,,,,, ओ हेलो ऐसा क्या कर दिया मैंने जो गंगा जमुना बहा रही हो.....??

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