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Chapter 74

इश्क़ या जुनून - Chapter 74

धरा :मम्मी जी क्षितिज के बिजनेस के लिए हमें पैसों की जरूरत है ऐसा कुछ भी दादाजी को नहीं मालूम......!!तो दादा जी के मदद करने का सवाल ही नहीं पैदा नहीं होता।

रीमा जी झुंझलाते हुए बोलती है,,,,,, पुत्तर तूने बोला ना बहुत एटीट्यूड है अंबर में......!! तो बस सामने से मानेगा नहीं कि तूने उस पर एहसान किया है लेकिन सच तो यह है कि तूने वाकई एहसान किया है !तो वो एहसान तो उसे उतारना है इसलिए उसने ये तरीका ढूंढा है तेरी मदद

करने का.....!!

अच्छा चल मैंने मान ली पुत्तर तेरी बात कि दादा जी को नहीं पता लेकिन अंबर को तो पता है ! अरे ये बड़े लोग किसी का एहसान नहीं रखना चाहते हैं तूने कहा था ना बड़ा एरोगेंट है तो मदद कर रहा है लेकिन उसमें भी उसकी अलग ही अकड़ है! अरे पुत्तर तू नहीं समझेगी इन पैसे वालों की टशन को। मैंने दुनिया देखी है....!! अब सामने से आकर एहसान मानेगा तो खुद को छोटा महसूस करेगा इसलिए मदद कर रहा है लेकिन उसमें भी एहसान जताना आदत होती है बड़े लोगों की......!! लेकिन अपने दादा की वजह से जता नहीं पा रहा।

तू अपने आप को छोटा मत समझ। तूने एहसान किया है खुराना ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के मालिकों पर ....!! अरे इन लोगों की आदत होती है वही ₹200 की शर्ट को बड़े से ब्रांड के नाम के साथ 20000 में खरीदने की.....!! इसलिए तुझे एक करोड़ ऑफर किए है.....!!

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