इश्क़ या जुनून - Chapter 106
धरा : अतीत अगर दुखद हो तो उसे याद करने से दर्द तो होता ही है पर हम बोलना चाहते हैं.....!! ये जानना आपके लिए बहुत जरूरी है....!!इतना बोलकर धरा एक बार फिर बोलना शुरू करती है। जबकि अंबर धरा की बात का मतलब समझने की कोशिश ही करता रह जाता है।
चाची जी ने हमें मनहूस घोषित कर दिया.....!! जब तब वो हमें अपने मां-पापा की मौत का जिम्मेदार ठहराने लगी....!! हम मनहूस है तभी हमारे मां-पापा हमें छोड़कर चले गए ....!! उन्हें हमसे प्यार नहीं था !होता तो हमें भी साथ ले जाते ...!! वो हमसे जान छुड़ा कर चले गए। धीरे-धीरे ये बातें हमारे दिमाग में बैठने लगी और हमें खुद से नफरत होने के साथ-साथ मां पापा पर भी गुस्सा आने लगा....!! ये गुस्सा धीरे-धीरे नफरत का रुप लेने लगा और एक दिन हमारी ये नफरत सबके सामने बाहर आ गई ...!! मां पापा की बरसी थी हालांकि दोनों गए तो चार दिन के अंतर पर थे लेकिन दोनों के प्रेम को देखते हुए एक ही दिन दोनों की बरसी मनाई गई और जब पूजा के समय हमें बुलाया गया तो हम आने के लिए तैयार ही नहीं थे....!! क्यों बैठे पूजा में....?? जब उन्हें हमारी परवाह ही नहीं थी तो हम क्यों दिखावा करें.....??? हमें भी नहीं है उनसे प्यार.....!! प्यार तो वो सभी से करते थे बस नहीं था तो..............
लेकिन चाचा जी के बोलने पर हम इनकार नहीं कर पाए पूजा में बैठ गए लेकिन ज्यादा देर दिखावा नहीं कर पाए और उस दिन हमारा गुस्सा सबके सामने फूट गया जब चाचीजी जी ने पूजा के वक्त आंसू बहाते हुए कहा कि काश भैया भाभी उस दिन धरा को वाटर पार्क लेकर नहीं गए होते.....!! दोनों ही बहुत अच्छे थे और प्यार तो इतना था दोनों में कि साथ ही चले गए....!!
हमें लगा के एक बार फिर वो हमारा नाम लेंगी.....!! यह जताएंगी कि हम उनकी मौत के लिए जिम्मेदार हैं ! ये जताएंगी की हमें छोड़कर सबसे उन्हें प्यार था...!! थक गए थे सुनते सुनते और गुस्से में न जाने क्या-क्या बोलते गए हमें तो याद भी नहीं है जो मन में आ रहा था बस बोलते जा रहे थे गुस्से में मां पापा की तस्वीर पर चढ़े हार भी खींचकर तोड़ दिए.....!! ना जाने क्या-क्या बोलते हुए बेहोश हो गए.....!!
जब होश आया तब चाचा जी और दादी मां ने बड़े प्यार से समझाया! दादी मां ने बताया कितना प्यार था ऐसे ही नहीं हम पीछे की सीट पर दादी मां की साइड जाकर गिर गए थे , मां जहां एक हाथ से पापा को धकेल कर खुद आगे हो गई थी तो वही दूसरे हाथ से हमें भी धकेल कर दादी मां की साइड कर दिया था.....!! क्योंकि हम ठीक मां के सामने और आगे वाली दोनों सीट के बीच में ...!! पेड़ का तना मां के सीने के आर पार हुआ था अगर हम वहां होते तो हमें भी लगता....!! मां हमसे और पापा से बराबर प्यार करती थी तभी हम दोनों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी.....!! पापा के जाने के पीछे हम जिम्मेदार नहीं है और ना ही ये वजह है कि वो हमसे प्यार नहीं करते थे इसलिए हमें छोड़ गए हैं बल्कि वो मां की मौत का सदमा नहीं बर्दाश्त कर पाए इसलिए चले गए। ना हम कहीं से भी उनकी मौत के लिए जिम्मेदार हैं और ना ही इसका मतलब ये है कि उनका प्यार हमारे लिए कम था.......!!
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