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Chapter 13

इश्क़ या जुनून - Chapter 13

देखकर धरा की आंखें चौड़ी हो जाती है और वो बोलती है,,,,,,,, दादी मां ये तो बाॅक्स के अंदर एक और बॉक्स है .....!!

कमला जी अपने होठों पर अपनी उंगली रखते हुए श्श्श्श्श्श्शश......!! धीरे बोल.....!! दीवारों के भी कान होते हैं....!! बोलकर कमला जी उस  बॉक्स में से एक बैग निकलती है और धरा की तरह पढ़ाते हुए बोलते हैं ये तेरी ही अमानत है सालों से संभाल कर रखी है......!! तेरे काम आ जाए इससे अच्छी बात क्या होगी......!! लेकिन पुत्तर तुझे इन्हें सीधे क्षितिज को देना चाहिए था.....!!

धरा  : दादी मां वो सामने से अपनी परेशानी हमें नहीं बता रहे हैं और हम इस तरह से उनकी मदद करेंगे तो शायद उन्हें अच्छा नहीं लगेगा ....!! हम उनकी self-respect को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते। ये ज्वेलरी रीमा आंटी क्षितिज को अपनी होने वाली बहू के लिए उनकी तरफ से बनवाए हुई बता कर दे या हम उन्हें हमारी तरफ से दे फर्क क्या पड़ता है ज्वेलरी तो हमारी ही है ना.....?? फिर बस सिक्योरिटी के लिए ही तो चाहिए .....!! कुछ दिन में वापस आ जाएगी।

कमला जी :धरा के माथे को चूमते हुए बोलती हैं जैसा तू सही समझे.....!!! क्षितिज की वजह से ये दे रही हूं वरना उसकी मां मुझे बिल्कुल चंगी नहीं लगती.....!! अगर क्षितिज नहीं होता तो रीमा को मैं तेरी सास हरगिज़ नहीं बनाती.....!!इस पायल की एक बात मुझे सउर की नहीं लगती लेकिन रीमा के मामले में मेरी राय भी पायल से अलग नहीं है.....!! पता नहीं मेरी बच्ची को कैसे रखेगी.....?? बस यही सोचकर भी कभी मन उदास हो जाता.....!! फिर क्षितिज को देखकर तसल्ली हो जाती है....!!

धरा : दादी मांआआआ......!! इतनी भी बुरी नहीं है वो......!! बस थोड़ा तेज स्वभाव की है......!! और आपको पता है, प्यार में बहुत ताकत होती है....!!

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