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Chapter 59

इश्क़ या जुनून - Chapter 59

नीरा वापस अपने अवतार में आ चुकी थी और अब नीरा को रोक पाना मिलन के बस की बात नहीं थी। बेचारा मन ही मन में खुद को कोस रहा था.....!! क्यों उसे उसकी परेशानी के साथ नहीं छोड़ दिया था। और जब नीरा की परेशानी के बारे में जान गया था तो क्या जरूरत थी उसकी गलतफहमी दूर करने की......?? बेचारा ये सोच कर परेशान था कि उसने ये क्या कर दिया और उससे भी ज्यादा इस बात से परेशान था कि उसने ये क्यों कर दिया.......??

दूसरी तरफ रानी जी फोन हाथ में लेकर फोन को ही लगातार घूर रही थी और अपना माथा पकड़कर बोलती हैं,,,,,,,,, ये लड़की किसी दिन मुझे पागल करके छोड़ेगी.......!! मैंने भी उसकी हां में हां मिला दी ....!!लेकिन किस चंपू से उसे शादी नहीं करनी है.......?? कब मैंने  इसकी शादी फिक्स की.......?? जब मैंने इसकी शादी किसी से फिक्स ही नहीं की है तो मना किसे करूं.......??

इधर मिलन नीरा को समझाते हुए बोलता है,,,,,,, मिस नीरा मैं आपके बारे में ऐसा कुछ भी नहीं सोचता......!! आप की इंगेजमेंट होने वाली है और आप अपनी इंगेजमेंट उस लड़के के लिए तोड़ रही हैं जिसके मन में आप को लेकर इस तरह की कोई फीलिंग नहीं है...!! देखिए बेवकूफी मत कीजिए......!! मेरा शादी वादी का कोई इरादा नहीं है.......!!

नीरा अपनी आंखें छोटी करते हुए बोलती है,,,,,,,, शादी का इरादा नहीं है से क्या मतलब है आपका.....??देखिए मिलन जी बिना शादी किए तो मैं आपको अपने ज्यादा करीब आने नहीं दूंगी इसलिए शादी तो आपको करनी पड़ेगी......!!

मिलन :अरे क्यों करनी पड़ेगी......??

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