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Chapter 95

इश्क़ या जुनून - Chapter 95

पुत्तर नाश्ता........!! खुद को नॉर्मल करते हुए बलजीत जी के हलक से बस यही दो शब्द निकलते हैं.....!!ना तो वो आगे बोल ही पाते हैं और ना ही अंबर आगे बोलने का मौका देता हैं.....!! क्योंकि तब तक अंबर बाहर निकल चुका था।

कहने भर की खामोशी थी आज नाश्ते की टेबल पर जबकि दिल और दिमाग में अलग-अलग शोर था....!!! हालांकि रोज किसी न किसी मुद्दे पर किसी न किसी की खिंचाई हो रही होती थी या शब्द बाण चल रहे होते थे लेकिन फिर भी माहौल खुशनुमा होता था।

माहौल को हल्का-फुल्का रखने के लिए ना तो आज बलजीत जी की उट पटांग बातें थी जो वो जानबूझकर किया करते थे और ना ही अंबर बैठा किलस रहा था ! अजीब सा खिंचाव था....!!

नाश्ते के बाद धरा बलजीत जी को दवाई देकर जाने लगती है तो..............

इतना बुरा नहीं है वो जितना दिखता है जिन हालात से गुजरा है उनकी वजह से ऐसा है.....!! बलजीत जी के ये शब्द सुनकर धरा के पैर रुक जाते हैं और वो सवालिया नजरों से बलजीत जी की तरफ देखती है तो.........

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