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Chapter 53

इश्क़ या जुनून - Chapter 53

फिर बलजीत जी :(झुनझलाते हुए) दुश्मन नहीं हूं उसका.......!! बकवास बंद करो ........!!ऐसा कुछ नहीं होगा.......!! ये जताना बंद करो कि तुम्हें ही उसकी परवाह है और मैं उसका दुश्मन हूं.......!! माना मैंने ज़िन्दगी से रूठा हुआ है....!! लेकिन मुझे विश्वास है कोई ऐसी ज़रूर होगी जो उसका हाथ पकड़ कर उसे वापस जिंदगी की तरफ मोड़ दे......!!

मिलन : ये प्रार्थना तो मैं भी दिन रात करता हूं .....!! लेकिन फिर भी दिल के किसी कोने में एक डर हमेशा रहता है कि अगर ऐसी कोई लड़की मिल भी गई जो उसका हाथ थाम कर उसे जिंदगी की तरफ मोड़ने का हौसला रखती हो तो कहीं अपनी सनक में उसे भी बर्बाद ना कर दे......!!

लेकिन आज मैं गलत साबित हो गया अगर कोई ऐसी मिल भी गई तो उसकी बर्बादी की जिम्मेदार उसकी सनक नहीं आपकी ज़िद्द होगी......!! इतना बोलकर मिलन तेजी से बलजीत जी के रूम से बाहर आ जाता है।

अगले दिन सुबह अंबर जैसे ही अपने केबिन में आता है तो उसकी नजर अपने टेबल पर रखे एक छोटे से, लेकिन बेहद खूबसूरत हाथ से पेंट किए हुए छोटे से पाॅट पर जाती हैं! जिसके अंदर वाइट कलर की पीस लिली अंबर के केबिन के कलर को कंप्लीमेंट करते हुए लगी हुई थी.....!! दरअसल अंबर के केबिन की दीवारें वाइट कलर से पुती हुई थी और उसके अंदर सारा फर्नीचर ब्लैक था.....!! कम शब्दों में कहा जाए तो ब्लैक एंड व्हाइट रूम था.....!! और ये फ्लावर पॉट एकमात्र ऐसी चीज थी जिसमें रंग थे.......!!

अंबर अपनी आइब्रो तिरछी करते हुए उस पाॅट को घूरता है तो उसकी नजरें थोड़ा सा आगे फिसल कर पाॅट के नीचे रखें कार्ड पर जाती है.....!!

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