Welcome back, Story Creator!

Keep writing amazing stories. Your readers are waiting, Creator.

Chapter 31

इश्क़ या जुनून - Chapter 31

अंबर : ज्यादा बर्दाश्त नहीं करता मैं.......सॉरी बोलने वाले लोगों को......!! इस ऑफिस में रहना है तो भूल से भी भूल नहीं होनी चाहिए....!! जुबान बंद रहनी चाहिए...!! बस उतनी खुले जितने की जरूरत है.....!! यानि कि मैं खोलने को बोलूं.......!!और दिमाग इतनी तेज चलना चाहिए कि जो मैं ना भी बोल रहा हूं वो भी तुम्हें समझ में आ जाए। Got it.....??

धरा  : जी अच्छे से सब समझ में आ गया.........!! जो आपने समझाया वो भी और जो आपने ना समझा कर  समझाने की कोशिश की वो भी.......!!

अंबर : (हैरान होते हुए) अच्छा.....?? तुम्हें देखकर लगता तो नहीं है कि तुम इतनी समझदार हो कि अंबर खुराना को समझ सको........!! लेकिन तुम्हारा ओवर कॉन्फिडेंस देखकर लग रहा है कि जान लू कि तुम्हें ऐसा क्या समझ में आया........??

अंबर के सवाल पर धरा मुस्कुराती है और अपने हाथ में पकड़े पीले गुलाब को जिसे उसने अपनी फाइल के नीचे छुपाया हुआ था ताकि स्टाफ में कोई भी देखकर गाॅसिप ना करें उसे अंबर की तरह बढ़ाते हुए बोलती है,,,,,,,,, थैंक यू सो मच.......!!

धरा के यूं अंबर की तरफ फूल बढ़ाकर थैंक यू बोलने पर अंबर हैरानी से कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोलने के लिए होता है तभी धरा अंबर को टोकते हुए बोलती है ,,,,,,,,हम मुद्दे पर भी आएंगे लेकिन पहले आपको धन्यवाद देना चाहते हैं । आपने जो उस दिन हमारे लिए किया उसके लिए......!!

This chapter is locked

Unlock this chapter with 5 diamonds to continue reading.

Your balance: 0 diamonds
Buy Diamonds
31 / 123
Storymania AI Ready with page context
Context Open the assistant from any page to use that page as context.
AI

Tell me what you are writing. I can help with ideas, outlines, grammar, plot, pacing, and summaries.