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Chapter 30

इश्क़ या जुनून - Chapter 30

कमला जी अपनी बात पूरी कर भी नही पाती है कि तभी राजन जी आगे बढ़कर अंबर के आगे हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं और बोलते हैं,,,,,,,,,, पुत्तर आज जो तूने किया है ना अपना गुलाम कर लिया मुझे.....!!! अगर आज मेरी बच्ची को कुछ हो जाता तो ऊपर जाकर क्या मुंह दिखाता मैं अपने भाजी और भरजाई (भैया और भाभी)को.......?? ये बोलते हुए राजन जी का गला रूंध जाता है .....!! और आंखों में आंसू आ जाते हैं.....!!

अंबर जिसका इमोशन से दूर-दूर तक का कोई नाता नहीं था इमोशंस थे तो सिर्फ अपने दादाजी के लिए और मिलन के लिए...!! बाकी किसी के भी कुछ भी कहने या इमोशनल होने से अंबर को कभी फर्क नहीं पड़ता था । लेकिन आज कमला जी के प्यार से अंबर का माथा चूम लेने और राजन जी के यूं आंखों में आंसू लेकर हाथ जोड़ कर खड़े हो जाने से पता नहीं क्यों अंबर को अजीब सी बेचैनी होने लगती है......!! वहां ठहरना अंबर को अनकंफरटेबल कर रहा था......!!

और वो बिना भाव के राजन जी से इट्स ओके......!! बोलकर रूम से बाहर चला जाता है.......!!

कमला जी : एनु की होया.......??

राजन जी : लगता है बेबे हमारी कोई बात बुरी लग गई शायद.........!!

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