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Chapter 47

इश्क़ या जुनून - Chapter 47

अंबर : छोड़ दू तुम्हें....?? ताकि तुम मेरा दूसरा वास उठाकर तोड़ दो......!! मालूम भी है कितना कीमती था वो...?? जो तुमने तोड़ा......!!

धरा : हां तो....?? आपको क्या लगता है आप हमारे साथ बदतमीजी करेंगे तो हम बार-बार बर्दाश्त करेंगे.....?? नहीं.....!! बिल्कुल भी नहीं.....!! जैसा आपने हमारे साथ सुबह किया वैसा हम आपको फिर करने नहीं देंगे.....!!

अंबर : (हैरानी से) आर यू क्रेज़ी.....??तुम्हें क्या लगा मैं तुम्हें किस्स करने वाला हूं.....??तुम्हें किस्स करने के अलावा कोई काम नहीं है मुझे.....?? मैं तुम्हें छोड़ रहा हूं .....!!खबरदार अगर मेरे वास की तरफ गई तो.....!!

धरा  :हमें भी कोई शौक नहीं है तोड़फोड़ करने का........!!जैसे आप हमें देख रहे थे हमें लगा हमारे साथ फिर कोई बदतमीजी करेंगे......!! और रही बात कीमत की तो वो आप हमारी सैलरी से काट लीजिएगा.....!!

अंबर  :रियली.....?? फिर तो कई महीने की सैलरी चली जाएगी तुम्हारी उसमें.....!!

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