इश्क़ या जुनून - Chapter 93
धरा शावर ऑन करके जैसे ही शावर के नीचे खड़ी होकर अपना चेहरा ऊपर करके खड़ी होती है तो चेहरे पर पानी की बौछार पड़ते ही उसकी आंखें बंद हो जाती है और आंखें बंद होते ही उसे अंबर का चेहरा दिखाई देता है ठीक वैसे ही जैसे आंखें खुलते ही उसने अंबर को सोते हुए देखा था एकदम शांति से आंखें बंद किये सुकून के साथ..….!!
धरा तुरंत अपनी आंखें खोल देती है और धीरे से बोलती है,,,,,,, सबका सुख चैन उड़कर कोई इतने सुकून से कैसे सो सकता है.....?? हम रो रहे थे ये सोचकर कि रात हमारी हालत का फायदा पता नहीं इन्होंने किस हद तक उठाया है.....?? सब समझते हुए भी जानबूझकर जो नहीं किया वहीं सोचने को हमें मजबूर कर रहे थे.....!! फिर मेड को भी हमारे पीछे लगा दिया कही हम कुछ भी समझ कर कुछ भी गलत खुद के साथ ना कर बैठे...!! पता नहीं चाहते क्या है.....?? हम जो भी इनके बारे में सोचते हैं हमेशा उसका उल्टा करके दिखाते हैं....!! जब भी हम इनके बारे में कोई राय बनाते हैं तो हम गलत साबित होते हैं। दूसरे का खून जलाने में जाने कौन सा मजा आता है.....?? ड्रैकुला जैसी हरकतें करते हैं...!! हरकतें नहीं बल्कि सच में ड्रैकुला है बस दांत गड़ा कर खून नहीं पीते हैं ....!! एक्चुअली इन्हें दांत गड़ाने की जरूरत ही नहीं है एडवांस्ड फॉर्म है ड्रैकुला की....!! आदि काल के ड्रैकुला को खून पीने के लिए नजदीक जाना पड़ता था अपने दांत गड़ाने पड़ते थे लेकिन ये दूर से ही अपनी जुबान से सामने वाले का खून सुखा कर अदृश्य रूप से पी जाते हैं......!!
न जाने और क्या-क्या धरा अपने आप में बड़बड़ाती रहती है और गुस्से में नहा कर रूम में आती है और मिरर के सामने बैठकर धरा अपने गीले बालों को झाड़ते हुए अपने बड़बड़ाने को कंटिन्यू करते हुए बोलती है........... हे देवी मां इन मॉडर्न ड्रैकुला के लिए कोई ऐसी चंटो चुड़ैल भेजना कि उनके सारे दांत तोड़कर हाथ में दे दे और इनकी जहरीली जुबान में गांठ मार कर इनके गले में लटका दे.......!! बोलते हुए धरा गुस्से में कंघा ड्रेसिंग पर पटकते हुए खड़ी होती है और खड़े होते हुए अपने बाल जोर से पीछे फेंकती है जोकि पीछे खड़े अंबर के मुंह पर जाकर लगते हैं.....!!
और अंबर बुरी तरह से छींक पड़ता है......!!
दरअसल अंबर धरा को सच बताने के लिए आया था ...!! ऐसा कोई इरादा था तो नहीं अंबर का लेकिन जिम में मशीनों के बीच अंबर का मन नहीं लग रहा था धरा की आंसुओं में डूबी आंखें अंबर का ध्यान भटका रही थी....!! साथ ही याद दिला रही थी किसी की रोती आंखों की......!! एक परछाई उभरती है और कोई आवाज अंबर के कान में गूंजती है......!! अंबर बुरी तरह से बेचैन हो उठता है।
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