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Chapter 73

इश्क़ या जुनून - Chapter 73

धरा नम आंखों से क्षितिज की आंखों में देखते हुए अंबर का आगे का दिया ऑफर बता देती है जिसे सुनते ही क्षितिज के भवे तन जाती हैं और वो गुस्से से बोलता है,,,,,,,,, कोई जरूरत नहीं है मुझे लोन की मैं खुद इंतजाम कर लूंगा और जरूरत तो तुम्हें उसकी नौकरी करने की भी नहीं है तुम कल ही रिजाइन करोगी.......!!

नहीं कर सकते हम रिजाइन.......!! इतना बोलकर धरा अपनी वो मजबूरी भी बता देती है कि उसने अनजाने में ही कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है और वो चाह कर भी 1 साल से पहले जॉब नहीं छोड़ सकती। और अगर ऐसा करती है तो सब कुछ बेच कर भी कंपनसेशन पे नहीं कर सकती।

क्षितिज गुस्से से टेबल पर अपना हाथ मारता है और अपने माथे को पकड़ते हुए बोलता है,,,,,, पहली नजर में ही वो इंसान मुझे पसंद नहीं आया था.....!! काश कि मेरे पास इतना पैसा होता तो अभी इसी वक्त उसके मुंह पर दे मारता ....!!कितना बेबस महसूस कर रहा हूं खुद को........!!

धरा , क्षितिज को यू परेशान देखकर क्षितिज के कंधे पर हाथ रखते हुए बोलती है,,,,,,,, क्षितिज संभालिए ना खुद को.......!! गलती हमारी है .....!!हमें बिना देखे पेपर साइन नहीं करने चाहिए थे.....!! एक महीना गुजर गया है 11 महीने की ही तो बात है.....!! अब हम आगे से ध्यान से किसी भी पेपर पर साइन करेंगे और समय पूरा होते ही रिजाइन कर देंगे.....!!

क्षितिज :11 महीने कम समय नहीं होता है धरा.......!! कैसे झेलोगी तुम 11महीने उस घटिया इंसान को.....!! जो इतनी चीप बात कर सकता है वो कल तुम्हारे साथ कुछ भी.............

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