इश्क़ या जुनून - Chapter 91
उन बच्चों में धरा को अपना बचपन दिखाई देता है...!! उसने भी तो बचपन में ही अपने मां पापा खो दिए थे....!! लेकिन फिर भी उसके पास एक परिवार था ...!! लाड़ करने वाली दादी और उसकी फरमाइशे पूरी करने वाले उसके चाचा जी....!! चाची के बोल कड़वे जरूर थे लेकिन दादी और चाचा जी के प्यार के आगे कहीं नहीं ठहरते थे....!! लेकिन उन बच्चों का क्या....?? 1 महीने में ही बड़े से शानदार बंगले से अनाथ आश्रम में आ गए थे....!!
ये सारी बातें धरा के दिमाग में घूम रही थी और उसे विचलित कर रही थी....!!
धरा अपने रूम में इधर से उधर चक्कर काटती है...!! रूम में उसे अजीब सी घबराहट महसूस हो रही थी तो धरा कमरे का दरवाजा खोलकर बालकनी में आकर खड़ी हो जाती है ठंडी ठंडी हवा धरा के चेहरे पर पड़ती है तो धरा को कुछ राहत महसूस होती है ....!!
धरा रेलिंग पर अपनी हथेली रखकर ठंडी हवा को महसूस करते हुए अपनी आंखें बंद कर लेती है तो फिर से उन दोनों बच्चों का चेहरा धरा की आंखों के सामने घूम जाता है और धरा उनके मासूम चेहरे और आंखों के खालीपन को देख घबरा कर आंखें खोल देती है....!! तभी धरा को पानी में जोर से किसी के कूदने की आहट होती है धरा अपनी नज़रें उधर घूमाती है तो स्विमिंग पूल में किसी को स्विमिंग करते देख धरा मन में बड़बड़ाती है,,,,,,,, रात में इस वक्त कौन हो सकते है....?? धरा अपनी आंखें टिमटिमा कर स्विमिंग पूल के आसपास की मद्धिम रोशनी में उस शख्स का चेहरा देखने की और पहचानने की कोशिश करती है.....!! लेकिन क्योंकि अंबर लैप मार रहा था तो देख नहीं पाती.....!! हम भी क्या सोच रहे हैं एक ही तो सिरफिरे इंसान है इस घर में.....!! जिन्हें पता नहीं कब कौन सा दौरा पड़ जाए.....??इतनी रात में स्विमिंग वही कर सकते हैं.....!! धरा इतना ही कह कर हटती है कि तभी अंबर की लैप कंप्लीट होती है और वो पूल के किनारे पर पहुंच कर रुक जाता है और सीढ़ियां चढ़कर पूल से बाहर आ जाता है ....!!
पास ही चेयर पर पड़ा बाथरोब उठाता है और उसे पहनने लगता है।
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