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Chapter 45

इश्क़ या जुनून - Chapter 45

धरा को अपनी तरफ बढ़ते देख अंबर अपनी आइब्रो टेडी करते हुए डेविन स्माइल के साथ बोलता है तो अब इन नाजुक कलाइयों से तुम मुझ पर वार करोगी.......??

लो मैं तुम्हारा काम आसान कर देता हूं बोलते हुए अंबर उसी डेविल स्माइल के साथ धरा की तरफ बढ़ने लगता है.....,!!

अंबर , धरा के एकदम नजदीक पहुंच जाता है और बोलता है,,,,,, लो आप बिल्कुल तुम्हारी पहुंच में हूं.....!! करो वार.......!!

धरा अंदर से घबरा रही थी लेकिन बाहर से पूरी हिम्मत दिखा रही थी ....!!वही एक तरफ दिल कह रहा था कि अंबर जो कह रहा है वैसा कुछ नहीं करेगा लेकिन दूसरी तरफ दिमाग सवाल खड़े कर  रहा था कि सुबह वाली अंबर की हरकत के बाद भी आपको ऐसा लगता है....??

धरा कशमकश में थी जो उसके चेहरे पर साफ नजर भी आ रहा था.....!! गला सूख रहा था....!! हाथ जिसमें धारा ने कांच का वास पकड़ा था कांप रहा था ....!! इसका एहसास अंबर को ना हो इसलिए धरा अपने दूसरे हाथ से वास वाले हाथ को इस तरह थाम लेती है जैसे उल्टा हाथ सीधे हाथ को हिम्मत दे रहा हो.........!!

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