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Chapter 105

इश्क़ या जुनून - Chapter 105

ये सुनकर अंबर जो खुद में उलझा हुआ था, हैरानी से धरा के चेहरे की तरफ देखता है.....!!

धरा जो थोड़ी देर पहले तक मुस्कुरा रही थी हंस रही थी ....!!अब उसके चेहरे पर दर्द था.....!! असीम दर्द.....!!

हमारे कहने का मतलब है कि जब हम छोटे थे तो हमें ऐसा ही लगता था और शायद हमेशा ऐसा ही लगता  अगर हमारी गलतफहमी दूर नहीं की जाती।

6 साल के थे ! स्कूल की छुट्टी थी तो हमने जिद्द की कि हमें वाटर पार्क ले चले ! हालांकि हमारे माँ पापा हमारी हर जिद्द पूरी करते थे लेकिन उस दिन उन्होंने ले जाने से मना कर दिया शायद कुछ जरूरी काम निपटाने थे पापा को लेकिन जब हम रोने लगे तो उन्हें हमें लेकर जाना पड़ा। हमारी आंखों में आंसू जो नहीं देख सकते थे।

हम बहुत खुश थे...!! दादी मां गांव में चाचा चाचा जी के साथ रहती थी! लेकिन उन दिनों वो सब भी आए हुए थे क्योंकि चाचा जी की जॉब लग गई थी.....!! तो दादी मां भी साथ चल पड़ी...!! जाना तो चाचा जी भी चाहती थी लेकिन उनकी दोनों बेटी मंत्रा और मंदिरा दोनों ही सफर की वजह से परेशान हो गई थी और उनकी तबीयत ठीक नहीं थी।  आगे की सीट पर मां और पापा थे जबकि पीछे की सीट पर हम दादी मां के साथ थे....!!

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