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Chapter 120

इश्क़ या जुनून - Chapter 120

बलजीत जी अब एक और पासा फेंकते हुए बोलते हैं,,,,,, ठीक है मेरा और अपना छोड़ इन बच्चों का ही सोच ले !धरा इतनी प्यारी बच्ची है अगर वो इस घर में आ जाएगी तो इन बच्चों को भी माँ मिल जाएगी , घर मिल जाएगा....!! देख शादी तो मुझे तेरी करानी ही है लेकिन मैं जानता हूं धरा से अच्छा कोई और इन्हें नहीं अपना सकता.....!! कोई और आएगी तो हो सकता है तुझे पत्नी और मुझे बहू मिल जाए लेकिन इन बच्चों को भी माँ मिलेगी इस बात की गारंटी नहीं है।

अंबर जो कब से मजाक किया जा रहा था अब सीरियस होते हुए बोलता है कैसी बातें कर रहे हैं आप दादाजी दुनिया देखने का दावा करते हैं और इतना भी नहीं समझते कि रिश्ते ऐसे नहीं बनाए जाते और ना ही निभाए जाते हैं....!! धारा कोई खिलौना है कि आप जिद करें और आपकी जिद पूरी करने के लिए मैं उसे लाकर दे दूं.....?? यह बात मैं भी जानता हूं कि धरा एकबहुत अच्छी लड़की है....!! इसीलिए तो नहीं चाहता उसे अपनी जिंदगी में शामिल करना.......!! उसकी खुशी क्षितिज में है.....!! आप क्या चाहते हैं आपकी खुशी के लिए अपन स्वार्थ के लिए या बच्चों के बेहतर फ्यूचर के लिए धारा की खुशियां छीन लूं इसका प्रेजेंट और फ्यूचर बर्बाद कर दूं.....??

मैं रख लूंगा इन बच्चों का ध्यान जिम्मेदारी मैंने ली है तो मैं उसे निभाऊंगा...! एक तरफ आप उससे प्यार होने का दावा करते हैं दूसरी तरफ उसी लड़की की खुशियां छीनने की बात करते हैं, ये कैसा प्यार है आपका.....?? यह बच्चे भी पल जाएंगे क्या मुझे नहीं पाला आपने.....??

बलजीत जी क्या वैसे ही पल पाया जैसे पालना चाहिए था अधूरापन नहीं था तेरी लाइफ में वही अधूरा पर इन बच्चों के हिस्से........

अंबर अब थोड़ी नाराजगी के साथ बोलता है,,,,,, इनफ दादाजी.....!! बंद कीजिए बचकानी हरकतें माना कि इन लोगों की कहानी और मेरी कहानी काफी हद तक मिलती-जुलती है लेकिन इनमें और मुझ में बहुत बड़ा फर्क है मैं उसी घर में रहा था और सौतेली मां का टॉर्चर झेला था जबकि इन बच्चों के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ ना तो ये उस घर में रहे थे और ना ही इन्होंने अपने डैड को टूटते बिखरते देखा था इन्होंने कोई टॉर्चर नहीं सहा वैसा कुछ भी गलत नहीं हुआ इनके साथ और आगे भी कुछ गलत नहीं होगा मैं होने नहीं दूंगा......!! बेफिक्र रही है इन्हें दूसरा नंबर नहीं बनने दूंगा.....!!

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