इश्क़ या जुनून - Chapter 98
बलजीत जी अपनी डबडबाई आंखों से कुछ पल धारा की तरफ देखते हैं और फिर वापस अपनी नज़रें झुका कर बोलते हैं कहीं भागी नहीं थी अंबिका.........!!
बलजीत जी की बात सुनकर धरा बुरी तरह से चौंक जाती है और चौंकते हुए बोलती है ,,,,,,,,ये आप क्या कह रहे हैं दादाजी ......??अगर भागी नहीं थी तो फिर कहां गई.....??? और अंबर सर की बहन .....??वो भी तो थी ना उनके साथ......??
सब उस रोजी का किया धरा था.....!! उसने अपने एक फोटोग्राफर दोस्त के साथ मिलकर अंबिका के फोटो के साथ छेड़छाड़ करके किसी और के फोटो पर अंबिका का चेहरा लगवा दिया....!! रणधीर ने उन फोटो पर एकदम से यकीन नहीं किया लेकिन जो लड़का उन फोटो में था और रोजी से ही मिला हुआ था। रोज ही किसी न किसी बहाने से अंबिका से टकरा ही जाता और बात करता ....!!
उसी वक्त दोनों की फोटो खींच ली जाती। रणधीर ने घुमा फिरा कर अंबिका से पूछना चाहा मसलन आज किसी से मिली थी.....?? लेकिन जब अंबिका का उससे कोई मतलब ही नहीं था .....!!और ना ही वो उससे मिल रही थी....!! इत्तेफाक से कुछ सेकेंड के लिए हाय हैलो हो जाती थी तो क्या बताती बेचारी....!! अंबिका की नजरों में वो कुछ था ही नहीं .......!!छोटी सी बात थी शायद इसलिए उसने बताया नहीं और रोजी ने इस बात का फायदा उठाकर रणधीर के मन में शक़ के बीज बोने शुरू कर दिए.....!!
एक दिन अंबिका रेस्टोरेंट में कॉफी पी रही थी तो वो लड़का आकर अपनी कॉफी उठाकर अंबिका की टेबल पर आकर बैठ गया। अंबिका ने कहा यहां और भी टेबल खाली है। लेकिन उसने कहा कि अकेले काफी पीना अच्छा नहीं लग रहा था, सोचा आपको जानता हूं तो आपके पास बैठ जाऊंगा.....!! बाकी आपके चेहरे को देखकर मुझे मेरी बहन की याद आती है उसने बात ऐसी कही कि अंबिका ने फिर उससे वहां से उठकर जाने के लिए नहीं बोला और यही गलती हो गई .....!!उस दिन भी रणधीर ने उन दोनों को देखा......!!
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