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Chapter 75

इश्क़ या जुनून - Chapter 75

रीमा जी मिश्री से भी मीठी जुबान करते हुए बोलती है,,,,,,,,, पुत्तर अब तू वहां पर कुछ दिन की मेहमान है तेरा घर तो तेरे पति का घर होगा.....!! जब तेरे होने वाले ससुराल को इससे ऐतराज नहीं है तो मेरे ख्याल से उन्हें ऐतराज करना नहीं चाहिए ....!! अब तो तुझे अपने घर के हिसाब से चलना है । अपने घर के बारे में सोचना है। अपने होने वाले पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना है।

धरा  :लेकिन मम्मी जी वो लोग..........

रीमा जी अपनी चेयर और ज्यादा धारा के नजदीक खींच कर उसके गाल को छूते हुए ,,,,,, ओहो पुत्तर अगर तुझे ऐसा लगता है कि उन लोगों को बुरा लगेगा या वो लोग परमिशन नहीं देंगे तो मत बता उन लोगों को.....!! अब तेरी जिम्मेदारी इस घर के प्रति बनने वाली है एक महीने बाद जो होना है वो 1 महीने पहले क्यों नहीं......?? उन लोगों से बोल दे तुझे एक हफ्ते के लिए कंपनी के काम से जाना है......!! मीटिंग है....!!बस इतनी सी बात बोलनी है.....!! उसमें क्या है....??

धरा :हमने आज तक कभी अपने परिवार से झूठ नहीं बोला है.......!!

रीमा जी :सच में.....?? वैसे पुत्तर मैं झूठ बोलने के लिए नहीं बोल रही हूं पूरा सच बताने से रोक रही हूं......!! ऑफिस के काम से ही जा रही है ना और मीटिंग भी है तेरे बाॅस के दादाजी के साथ.....!!

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