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Chapter 116

इश्क़ या जुनून - Chapter 116

नीरा :(जोर से चौकने की एक्टिंग करते हुए) क्या बात कर रही है....?? ये कब हुआ.....?? अरे तो फिर क्षितिज ....??उसका क्या होगा....?? कहीं तू मंडप से भागने वाली तो नहीं है, अंबर सर के साथ......?? नीरा इतना बोलकर हंसते हुए धरा की तरफ अपनी आंखें नचाती है तो धरा तुरंत चौकी से उठते हुए बोलती है रुकिए आप.....!! अभी बताते हैं हम आपको.....!! सुबह से कोई और नहीं मिला ना आपको खिंचाई करने के लिए.....??

मत बता....!! मुझे नहीं पूछना कुछ भी......!! मुझे तो बस बेचारे क्षितिज से सिंपैथी हो रही थी .....!! बोलते हुए नीरा आगे आगे दौड़ती है और धरा नीरा के पीछे ....!!जबकि धरा को यू चौकी से उठकर नीरा के पीछे दौड़ते देख पायल जी के माथे में बल पड़ जाते हैं! वैसे भी धरा और क्षितिज की शादी से खुश नहीं थी क्षितिज को तो वो अपनी मंदिरा के लिए चाहती थी...! इसलिए दिल में लगी आग को बुझाने के लिए वो धरा को उल्टा सीधा बोलने के लिए मुंह खोलने वाली होती है लेकिन पास पड़ोस की औरतें (वैसे उनका लिहाज तो पायल जी को नहीं था)और राजन जी को सामने ही देख धरा को तो कुछ नहीं बोल पाती लेकिन अपने मुंह तक आया जहर वापस गले में ना सटक कर पास ही खड़ी अपनी सास के कानों में घोलने से नहीं चूकती और बोलती है,,,,,,,, बीजी कुछ बोलेंगी नहीं अपनी संस्कारी पोती को .....?? लाज शर्म जरा भी नहीं है.....!! शादी तो सबकी होती है ये हमारे यहां तो नहीं होता कि घर मेहमानों से भरा पड़ा हो और होने वाली दुल्हन ऐसे उछलती घूम रही हो। शर्म हया तो जैसे बेच कर खा ली ! शादी की खुशी में देखो कैसी मस्ती चढ़ी है! कोई रोकने टोकने वाला तो है ही नहीं ......!! हम हैं ही कौन आखिर ....?? बस खिलाने पिलाने और लाड़ लड़ाने के लिए हैं !क्योंकि जरा सा डाटेंगे तो उल्टा लेक्चर हम ही को सुनने को मिलेगा कि बिना मां-बाप की बच्ची है भाई.....!! बिना मां बाप की बच्ची होना वरदान हो गया इसके लिए तो....!!मनमानी करने का मौका जो मिल रहा है.....!!

कमला जी घूर कर पायल जी को देखती हैं और धीमें मगर सख्त लहज़े में बोलती है,,,,,,,,,,,,, अमर रहने के लिए कोई नहीं आता बहू !एक दिन सबको ऊपर वाले को मुंह दिखाना होता है ! थोड़ा तो बाबा जी का खौफ खा बहू! कितना सिर पर बिठा कर रखा है ये तो तू भी अच्छी तरह से जानती है...!! दो पल सुकून के नहीं काटे उस बच्ची ने इस घर में फिर भी हंसते हुए सब सह जाती है! कभी होठों पर शिकायत नहीं लेकर आती...!!चार दिन बचे हैं उस बच्ची की विदाई में कम से कम चार दिन तो अपने जहर भरे तीरो को अपने तरकश में ही रहने दे....!! दो दो बेटियों की मां है बिन मां बाप की बच्ची को इतना भी मत सता कि उसके दिल की निकली आह तेरी बच्चियों पर पड़ जाए.......!!

पायल जी : अपने दांतों पर अपने दांत जमा कर से एक एक शब्द को चबाते हुए)बीजी जुबान संभालकर.......!!

जो चीज संभालनी कभी तुझे नहीं आई उसे संभालने की हिदायत दूसरे को देती हुई अच्छी नहीं लगती.....!!

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