इश्क़ या जुनून - Chapter 100
थोड़ी देर तक रूम में खामोशी छाई रहती है फिर उस खामोशी को तोड़ते हुए धरा बोलती है,,,,,,, आप जो चाहते हैं वो बहुत मुश्किल है...!! सालों से जिस झूठ के भ्रम जाल में अंबर सर उलझे हुए हैं हमारे हिसाब से उससे उन्हें पूरी तरह से बाहर सिर्फ सच लेकर आ सकता है।
और जहां तक हम समझे हैं आप चाहते हैं कि किसी का प्यार, किसी की वफा ,किसी का साथ, उन्हें इस सबसे बाहर ले आए......!!
लेकिन इसमें तो हम आपकी बिल्कुल भी मदद नहीं कर सकते। आप जो सोचते हैं ,हो सकता है वो हो जाए ...!!लेकिन उसके लिए हम नहीं बने हैं......!! आप जानते हैं ना हमारी शादी होने वाली है.....??
बलजीत जी : जानता हूं....!! लेकिन एक दोस्त बनकर उसके नजरिए को बदलने में थोड़ी तो मदद कर सकती हो ना....?? अंबर जिस जाल में फंसा है उस जाल के धागों को थोड़ा तो कमजोर कर सकती हो ना........!! उसके हिसाब से तो सभी औरतें बेवफा होती है! एक दोस्त के रूप में तुम्हें जानेगा तो सिर्फ एक दोस्त को नहीं एक लड़की को भी समझेगा....!! ना उसकी सोच एक दिन में बनी थी ,और ना ही एक दिन में बदलेगी ! ये अच्छे से जानता हूं मैं! धीरे-धीरे ही सही उसकी होने वाली हमसफर को कुछ तो मदद होगी। वरना वो तो किसी को नजदीक ही नहीं आने देता....!! दोस्त बनकर ही कोई धीरे-धीरे उसका नजरिया बदलेगी तो शायद वो बदल जाए.....!!
(बलजीत जी अपना नजरिया समझाने की कोशिश कर रहे थे जो दिल में आ रहा था वो बोलते जा रहे थे !उन्हें किसी न किसी तरह धरा को रोकना था क्योंकि जानते थे धरा जाने का फैसला कर चुकी है और नहीं रुकेगी और ये भी जानते थे कि जिस तरह इन दोनों का रिश्ता है उस तरह इतने कम समय में बलजीत जी को अपनी मंजिल नहीं मिलेगी इसलिए वो सच बता देते हैं अंबर को समझाने के बाद भी धरा से उसका व्यवहार कुछ खास बदल नहीं रहा था.....!!
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