इश्क़ या जुनून - Chapter 88
धरा आश्रम के मैनेजर के पास जाती है तो अंबर मैनेजर से इस तरह बात कर रहा था जैसे बहुत अच्छे से जानता है.....!!
एक पल के लिए धरा के दिमाग में ये सवाल कौंधता है लेकिन अगले ही पल उसे अपना जवाब भी मिल जाता है,,,,,,,, जरूर उन दोनों बच्चों की वजह से ही अंबर सर मैनेजर को जानते हैं....!! लेकिन ये बच्चे यहां पर.....??अंबर सर ने इनकी जिम्मेदारी ली थी ना......!! फिर इन बच्चों को यहां क्यों छोड़ दिया.....?? ये विचार मन में आते ही धरा को अंबर पर गुस्सा आने लगता है और वो मन में बोलती है,,,,,,,, हमें लगा था कि इनके कैरेक्टर में ही प्रॉब्लम है लेकिन फिर भी इतने भी बुरे नहीं हैं! हमें विकास सर के गुंडो से बचाया ! मिस्टर कुकरेजा के केस में आपने जो कुछ किया ! मिस्टर कुकरेजा को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने वाली उनकी वाइफ को जेल भिजवाया हालांकि हमें लगा नहीं था कि आप ऐसा कुछ करेंगे ! हमें लगा था कि जिस तरह का आपका चरित्र है कहीं आप सजा दिलवाने के बहाने उनके साथ अफेयर ना चला ले । दोनों के हीं करैक्टर सही नहीं है और दो गलत लोग मिलते हैं तो अच्छी छनती है उनमे...!! लेकिन कुकरेजा सर के बच्चों को यहां अनाथ आश्रम में छोड़कर आपने सही नहीं किया...!! महल जैसा घर है कौन सा आपको उनके बच्चों के लिए बेबी सिटिंग करनी थी....??क्या एक नैनी नहीं रख सकते थे .....?? अपनी जिद मनवाने के लिए सिर्फ एक हफ्ते में हमें एक करोड़ देने के लिए तैयार है तो क्या इतने बड़े महल से घर में दो छोटे-छोटे नन्हे फरिश्ते नहीं रह सकते थे....? कितने भरोसे से कुकरेजा सर ने अपने बच्चों की जिम्मेदारी आपके ऊपर छोड़ी थी उनकी अंतिम इच्छा भी आप पूरी नहीं कर पाए .....!!क्या फायदा ऐसी दौलत का.......??
धरा सोचती जा रही थी और उसका पूरा गला कड़वाहट से भर जाता है।
धरा के ख्यालों को विराम तब लगता है जब आश्रम की एक कर्मचारी जिसने शायद दो दिन पहले ही आश्रम में काम करना शुरू किया था , धरा के पास आकर बोलती है,,,,,,, जी मैंम क्या मैं आपकी कुछ मदद कर सकती हूं....??
धारा जैसे नींद से जागती है और अपनी सोच से बाहर आते हुए बोलती है ,,,हां ...!!नहीं....!! हमारा मतलब है.... हां हमें आश्रम के मैनेजर सर से मिलना था....!!
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