इश्क़ या जुनून - Chapter 61
बात बढ़ती देख विक्रम जी मिस्टर खन्ना से बोलते है ,,,,,,,, ओए खन्ने चोरी और सीनाजोरी ना कर .....!! अगर तुझे सब पता है अंबर के बारे में तो ये भी पता होगा कि बलजीत से ऊंची आवाज में बात करना तो दूर उसे नजर उठा कर देखने वाले को भी अंबर कही का नही छोड़ता....!!
तेरी भलाई इसी में है कि अपने फैलाएं रायते को समेट और चुपचाप यहां से चला जा......!! क्योंकि अंबर को अगर कुछ पता चला तो ऊपर वाला भी नहीं जानता कि वो तेरा क्या हाल करेगा.....?? क्यों दूसरों के लिए मिसाल बनना चाह रहा है.......?? लोग मिसाल देंगे कि खन्ना नाम का कोई बिजनेसमैन था जिसकी जुबान ने उसे दुनिया से मिटा दिया। मिसाल बनने का शौक हो तो एक और शब्द अपनी इस दो पैसे की टुच्ची सी जुबान से निकालना वरना चुपचाप निकल जा......!!
खन्ना अपमान का घूंट पीकर चुपचाप वहां से जाने में ही अपनी भलाई समझता है और क्योंकि अपना गुस्सा बलजीत पर पूरी तरह नहीं निकाल पाता तो उसे अपनी बीवी पर निकाल देता है और खींच के थप्पड़ मिसेज खन्ना के मारते हुए बोलता है,,,,,,,,,, चल यहां से.....!! मेरा कहा अगर तुझसे नहीं करा जा रहा था तो यहां आने से पहले मुझे बता देती तो कम से कम यूं बेइज्जती तो नहीं होती.......!! इतना बोल कर मिस्टर खन्ना वहां से अपनी बेटी के साथ निकल जाते हैं और मिसेज खन्ना नम आंखों से अपने गाल पर हाथ रखे एक बार अपने पति और बेटी को जाते हुए देखते हैं और एक बार विक्रम जी और बलजीत जी को देखती है,,,,,,,, बदले में बलजीत जी और विक्रम जी उनकी तरफ हाथ जोड़ देते हैं और बोलते हैं माफ करना बेटा हमारी वजह से............
मिसेस खन्ना उनकी बात बीच में ही काटते हुए बोलती है नहीं अंकल जी इसमें आपकी गलती नहीं है इसमें गलती मेरी है जो आज तक इनके हर फेलियर हर बदतमीजी को अपनी गलती मानकर सहती आई हूं......!!! इतना बोल कर मिसेज खन्ना तेज कदमों से वहां से निकल जाती हैं.....!!
इधर इतने सब तमाशे के बाद बलजीत जी मायूस से बैठे हुए थे उनको मायूस देखकर विक्रम जी बोलते हैं एक और............
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