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Chapter 38

इश्क़ या जुनून - (धरा का रेजिग्नेशन)Chapter 38

और फिर अगले ही पल धरा टेबल पर पड़ा एनवेलप उठाती है और उन्हें टुकड़े टुकड़े करके अंबर के चेहरे पर फेंक कर मारते हुए बोलती है,,,,,,,,,,,, गलती हमारी ही है जो आप में अच्छाई देख ली.....!! आपकी नौकरी आपका प्रमोशन नहीं आपको मुबारक हो.....!! आप क्या हमें टर्मिनेट करेंगे......?? इतनी औकात नहीं है आपकी .......!! हम खुद आपकी नौकरी छोड़ कर जा रहे हैं.......!!

इतना बोल ,, धरा अपने आंसू पोंछते हुए अंबर के केबिन से निकल जाती है.......!!

जबकि अंबर अपने दोनों गालों पर हाथ रखे अभी भी स्तब्ध सा खड़ा था......!! पहला एक्सपीरियंस जो था थप्पड़ खाने का......!! कुछ पल यूं ही अपने केबिन के दरवाजे को घूरने के बाद अंबर अपनी टेबल पर रखे सामान को हाथ मार कर गिरा देता है .....!! लेकिन अगले ही पल अंबर खुद से बात करते हुए बोलता है कंट्रोल अंबर अपना गुस्सा इन चीजों पर नहीं बल्कि जो इस गुस्से की वजह है उस पर उतार .....!!  फिलहाल के लिए जज्ब कर लें इस गुस्से को .....!! इतना बोलकर अंबर अपनी कुर्सी पर जाकर बैठता है और अपने दोनों पैर अपने टेबल पर पसारते हुए धरा के टुकड़े-टुकड़े करके फेंके गए कागज को उठाकर देखता है और फिर अचानक से अंबर के चेहरे पर डेविल स्माइल आ जाती है......!! और बेहद रहस्यमई हंसी हंसते हुए बोलता है,,,,,,,,,,,, गलती कर दी मिस धरा मेहरा......!! बहुत बड़ी गलती कर दी.....!! ये थप्पड़ बेशक तुमने मेरे गाल पर मारा है लेकिन इसकी गूंज तुम सुनोगी.....!! बहुत शौक है ना तुम्हें ज्ञान बांटने का......!! बहुत गुरूर है ना तुम्हें अपनी मोहब्बत पर.....!! वादा करता हूं तुम्हारे इस गुरुर को तोड़ कर अपने कदमों तले नहीं रौंदा तो मेरा नाम अंबर खुराना नहीं......!! इतना बोल कर अंबर अपना फोन निकालता है और फोन पर किसी को कुछ इंस्ट्रक्शन देता है और लास्ट में बोलता है,,,,,,,,,,, एंप्लोई का नाम है मिस धरा मेहरा.....!! और हां फटाफट काम करो....!! मिस धरा मेहरा फिलहाल ऑफिस में ही हैं ...!! इससे पहले कि मिस धरा का रेजिग्नेशन लेटर मेरी टेबल पर आए उससे पहले वो पेपर मेरी टेबल पर होने चाहिए......!! अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर अपना रेजिग्नेशन लेटर टाइप कर लेना.....!! इतना बोलकर अंबर फोन डिस्कनेक्ट कर देता है।

कुछ ही देर में धरा अपने डेस्क से अपना सामान समेटती है और फिर नम आंखों से अपना रेजिग्नेशन लेटर लिखती है........!!

धारा अपना रेजिग्नेशन लेटर लिखने के साथ साथ लीव एप्लीकेशन लिखती है और नम आंखों से अपने डेस्क पर बैठे-बैठे एक बार पूरे ऑफिस को देखती है और फिर भाव विभोर होकर अपनी टेबल कुर्सी को आखिरी बार छूती है ऐसा करते हुए उसकी आंखें बहने लगती है और फिर धरा मन ही मन में खुद को समझाती है और अपने आंसू पोंछती है......!!

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