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Chapter 83

इश्क़ या जुनून - Chapter 83

अंबर  :सॉरी मिस्टर सीनियर खुराना....!! मदद करने की कोशिश मैंने थोड़ी देर पहले की थी बदले में मेरी शान में न जाने कितने बड़े-बड़े कसीदे पढ़ दिए गए और न जाने कौन-कौन से नामो से नवाज दिया गया......!!

इतना बोलकर अंबर अपने गॉगल्स निकालता है और अपनी आंखों पर चढ़ाते हुए कुछ इस अंदाज में आगे बढ़ जाता है मानो जता रहा हो कि उसने कुछ देखा ही नहीं या उसे कुछ दिख ही नहीं रहा हो...!! फुल एटीट्यूड में था ये कहे तो ज्यादा सही होगा....!! क्योंकि गाॅगल्स लगाने की जरूरत ही नहीं थी! ना धूप थी और ना ही धूल थी.....!!

दूसरी तरफ धरा उठने की कोशिश करती है लेकिन कराह कर वापस गिर जाती है.....!! गिरने की वजह से धरा के पैर में जबरदस्त मोच आ गई थी....!!

धरा को दर्द में देख बलजीत जी अंबर को आवाज लगते हैं अंबर जो 8-10 कदम आगे जा चुका था बलजीत जी की आवाज सुनकर रुक जाता है। और बिना मुड़े पूछता है ,,,,,,कहिए.....!!

बलजीत जी :कहना क्या है पुत्तर.....!! तेरी मदद चाहिए....!!बच्ची के पैर में मोच आई है......!!

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