Chapter 330
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 330
Preview mode only. Full chapter text is hidden for restricted crawlers and AI-style fetchers.
फिर विक्रम वेदिका के पास आकर बोला तुम ठीक तो होना । यह सुनकर वेदिका बोली हां लेकिन यह सब कुछ समीरा ने किया है वेदिका ने जैसे ही यह कहा तो विक्रम और वेदिका ने एक दूसरे की तरफ देखा ।