Chapter 248
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 248
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वही शाम को जब रुचिका वेदिका के साथ अपने घर पर आई तो उसने राधा के द्वारा बताए गए रिश्ते की सारी बात वेदिका को बताई । वही जब यह वेदिका ने सुना तो वह बहुत परेशान हो गई और हड़बड़ाते हु