Chapter 298
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 298
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वही देवी किशन और सुनीता दोनों विक्रम के पास आए तब उन्हें आए देखकर विक्रम ने उनके पैर छू लिए । तब सुनीता बोली हमेशा से ही अरमान था कि तुम्हें दूल्हा बनता हुआ देखू तुम्हारी शादी होते