Chapter 289
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 289
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वही अपने घर पर आकर वेदिका विक्रम से अपने मोबाइल से बातें करने लग गई दोनों बातें कर रहे थे तभी रुचिका जब आई तो उसने दरवाजा खटखटाया । तब वेदिका जल्दी बाजी में फोन वहीं पर रखा और दरवा