Chapter 18
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 18
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धीरे-धीरे इसी तरह दिन गुजर गया था शाम को समीरा को लेने के लिए उसका भाई नवीन आया हुआ था, वह बाहर अपनी गाड़ी में समीर के आने का इंतजार कर रहा था । तभी वेदिका आई और गाड़ी में आकर बैठ