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Chapter 201

कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 201

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तब अपनी मां की बातें सुनकर और उसका फैसला सुनकर वेदिका रोते जा रही थी, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या बोले क्योंकि उसकी मां कुछ समझने के लिए तैयार ही नहीं थी । तब रुचिका बोली

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