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Chapter 67

कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 67

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धीरे-धीरे इसी तरह रात गुजर गयी, वही समीरा जिसे तो जैसे सारी रात नींद नहीं आई थी यह सोचकर कि वह वेदिका को विक्रम से दूर कैसे करेगी । तब सुबह उठते ही उसने जल्दी ही दादी सा के पास कॉल

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