Chapter 42
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 42
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तब नीरज की बात सुनकर वेदिका हैरानी से बोली मतलब माना कि हम दोनों एक साथ पढ़े लिखे हैं लेकिन इतना भी मिलना जरूरी नहीं है कि तुम मुझसे मिलने के लिए रोज यहां आ जाओ । तब नीरज बोला वेदि