Chapter 64
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 64
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तब वेदिका को सच में डूबे हुए देखकर विक्रम उसकी तरफ देखते हुए बोला क्या हुआ । तब वेदिका बोली कुछ नहीं भगवान का शुक्र है इतनी बड़ी भला टल गई । तब विक्रम बोला वैसे उसे घटिया इंसान नीर