Chapter 170
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 170
Preview mode only. Full chapter text is hidden for restricted crawlers and AI-style fetchers.
तब वेदिका को अपनी मां सुनीता पर यकीन करते देखकर और सच्चाई सामने लाने की बात सुनकर विक्रम बोला वेदिका, तब उसकी बात बीच में काटते हुए वेदिका बोली आपने मुझसे कहा था ना कि आप कभी जब भी