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Chapter 251

कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 251

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वैसे वेदिका जब भी फोन को छुपा कर रखती तो उसे स्विच ऑफ करके ही रखती थी फिर उसने दरवाजा खोला । तब रुचिका उसकी तरफ देखकर बोली इतनी देर कहां लगा दी कब से दरवाजा खटखटा रही थी, तब यह सुन

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