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Chapter 210

कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 210

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वही वेदिका को सोच में डूबे हुए देखकर तब उसकी मां रुचिका बोली देख वेदिका लड़के वाले आ गए हैं और मैं जो कुछ कर रही हूं तेरे ही बारे में तेरे भले के बारे में सोच रही हूं, तू तो नादान

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