Chapter 192
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 192
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तब गौरी के वापस घर लौट आने की सुनकर वेदिका बोली मैं तुम्हें कुछ समझा नहीं सकती गौरी बस इतना समझ लो कि मेरा और तुम्हारे भाई सा दोनों का अब तक का ही रिश्ता था, आज के बाद हमारा एक दूज