Chapter 215
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 215
Preview mode only. Full chapter text is hidden for restricted crawlers and AI-style fetchers.
वही विक्रम के जाने के बाद रुचिका ने गुस्से में वेदिका का हाथ की बांह पकड़कर उसे खड़ा किया और बोली क्या था यह सब कुछ । तब यह सुनकर वेदिका अपनी मां की तरफ देखने लगी, तब रुचिका गुस्से