Chapter 194
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 194
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तब देवी किशन को इस तरह माफी मांगते देखकर और उसकी बातें सुनकर सुनीता ने अपने आंसू पोंछे और देवी किशन की तरफ देखते हुए खड़े होकर बोली क्या आपके माफी भी मांगने से जो कुछ मैंने बर्दाश्