Chapter 283
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 283
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वहीं विक्रम के समझाने पर वेदिका ने रोना बंद किया,वह अब विक्रम का हाथ अपने हाथों में लेकर उससे बातें कर रही थी, दोनों एक दूजे से बातें कर रहे थे, तभी रुचिका वहां आई । तब अपनी मां को